शुरू हुआ वैशाख का महीना, इसमें कर लें ये छोटे-छोटे काम, बनने लगेंगे हर कार्य, मिलेगी कृष्ण कृपा
हिंदू कैलेंडर के अनुसार दूसरा माह 14 अप्रैल से प्रारंभ हो चुका है और यह वैशाख का महीना कहलाता है. इस माह को कई लोग माधव मास भी कहते हैं. क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख माह में मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण व विष्णु जी की आराधना की जाती है. मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु को वैशाख का महीना बहुत प्रिय होता है.
हिंदी महीनों में वैशाख की गिनती सबसे शुभ मास में की जाती है. वहीं ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर इस महीने कुछ विशेष उपाय कर लिये जाएं तो व्यक्ति को इससे पुण्य व शुभ फलों की प्राप्ति होती है. कि वैशाख के महीने में किन-किन चीजों का दान करना चाहिए और कौन से कार्य करने से बचना चाहिए.
वैशाख माह में जरूर करें ये कार्य, मिलेगा पुण्य
वैशाख माह में पूजा-पाठ ,स्नान और दान का बहुत
महत्व है. यह समय है जब आप छोटे-छोटे कार्य से भी बड़े पुण्य प्राप्त कर सकते हैं, इसलिए वैशाख के पवित्र माह में ये कार्य करना चाहिए
जल का दान करें
तेज धूप में राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना या उन्हें शीतल जल पिलाना पुण्यदायी होता है. वैशाख का महीना बहुत गर्म होता है ऐसे में सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी दाना-पानी रखना बेहद पुण्य का काम माना जाता है. इसलिए इस माह ये कार्य जरूर करें.
फलों का दान
इस महीने गरीबों को आम, खरबूजा जैसे फल जो की शरीर में पानी की पूर्ति करते हैं ऐसे फलों का दान करना बेहद अच्छा माना जाता है.
जूते-चप्पल का दान करना
जूते-चप्पल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है. इससे न केवल उनकी दुआ लगती हैं बल्कि सौभाग्य भी बढ़ता है और तो और कुंडली में मौजूद खराब शनि की स्थिति में भी सुधार होता है.
वैशाख माह में भूलकर भी ना करें ये काम
वैशाख माह में तेज गर्मी होती है ऐसे में कुछ बातों पर ध्यान देने से स्वास्थ्य और धर्म दोनों की रक्षा होती है. जब सूर्य सिर के ऊपर होता है उस समय बाहर निकलने से बचें.
वैशाख के महीने में तली-भुनी व मसालेदार चीजों से दूरी बनाकर रखें और जितना हो सके हल्का, सादा और ठंडक देने वाला भोजन करें.
वैशाख के महीने में देर रात भोजन करने से बचें, क्योंकि यह आपका पाचन बिगड़ता है और धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो भी यह अनुचित माना गया है.
इस माह में जमीन पर सोना अच्छा माना जाता है यह न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि यह विनम्रता और तपस्या का प्रतीक भी है.

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