सीबीएसई स्कूलों में टिफिन की निगरानी, बच्चों की सेहत के लिए चीनी पर सख्ती
भोपाल: अब सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में छात्रों के लंच बॉक्स (टिफिन) की निगरानी की जाएगी कि वे क्या खा रहे हैं और उसमें कितनी मात्रा में चीनी है। सीबीएसई ने हाल ही में एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसके तहत सभी स्कूलों को 15 जुलाई तक अनिवार्य रूप से "चीनी बोर्ड"(Sugar Board) लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम बच्चों में बढ़ते टाइप-2 डायबिटीज के मामलों को देखते हुए उठाया गया है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) द्वारा किए गए एक सर्वे में यह सामने आया कि 4 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चे अनुशंसित सीमा से तीन गुना अधिक चीनी का सेवन कर रहे हैं। इससे कम उम्र में ही टाइप-2 डायबिटीज का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
चीनी बोर्ड क्या है और इसका उद्देश्य क्या होगा?
स्कूलों में लगाया जाने वाला चीनी बोर्ड बच्चों के टिफिन में लाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा पर नजर रखेगा। इसकी निगरानी स्कूल के प्राचार्य, शिक्षक और छात्र स्वयं भी करेंगे। स्कूल प्रबंधन एक साप्ताहिक या मासिक फूड मेन्यू तैयार कर सकता है, जिसमें मीठे पदार्थों की निर्धारित सीमा तय होगी।
सहोदय ग्रुप ऑफ सीबीएसई स्कूल, भोपाल के अध्यक्ष चैतन्य सक्सेना ने बताया कि छात्रों के टिफिन में शुगर कंटेंट की जानकारी बोर्ड पर दर्ज की जाएगी और अभिभावकों को पौष्टिक भोजन के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।
सर्वे की मुख्य बातें:
- 10 वर्ष तक के बच्चों को कुल कैलोरी का केवल 5% चीनी से लेना चाहिए।
- वर्तमान में बच्चे चॉकलेट, मिठाइयों और जंक फूड से लगभग 15% चीनी ले रहे हैं।
- अधिक चीनी सेवन से कम उम्र में ही टाइप-2 मधुमेह का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है।

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