जयशंकर की दो टूक, आप पानी की मांग करते........दूसरी ओर आंतकवादियों को भेजते हैं
नई दिल्ली । केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिंधु जल समझौते के बहाने पाकिस्तान को फिर खरी-खोटी सुना दी है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि भारत के पास बुरे पड़ोसियों से खुद की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। विदेश मंत्री ने कहा कि आप हमसे पानी बांटने का आग्रह नहीं कर सकते हैं, वहां भी तब जब आप (पाकिस्तान) हमारे यहां आतंकवाद फैला रहे हैं। वहीं, भारत ने जम्मू-कश्मीर में निलंबित सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान के हिस्से वाली चेनाब नदी पर नया पावर प्रोजेक्ट (दुलहस्ती स्टेज-दूसरा पावर प्रोजेक्ट) बनाने का फैसला किया है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान फिर से रोने लगा है। पड़ोसी देश ने कहा कि नई दिल्ली की ओर से चेनाब नदी पर पावर प्रोजेक्ट बनाने का ऐलान किया गया, लेकिन हमें इसकी जानकारी तक नहीं है। पाकिस्तान ने भारत के फैसले के खिलाफ दुनियाभर में जाकर शिकवा-शिकायतें कीं, पर कुछ लाभ नहीं हुआ। भारत के नए कदम से इस्लामाबाद को और मिर्ची लगी है।
जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना पड़ोसी देश पर तीखा हमला कर कहा है कि भारत का एक ‘बुरा पड़ोसी’ है, जो लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और इसके बाद भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया कैसी होगी, यह फैसला केवल नई दिल्ली करेगी, किसी बाहरी दबाव या नसीहत को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में कई देशों के पड़ोसी मुश्किल हो सकते हैं, लेकिन भारत की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है, क्योंकि उसके पड़ोस में एक ऐसा देश है जिसने आतंकवाद को सुनियोजित तरीके से अपनी नीति के रूप में अपनाया है।
जयशंकर ने कहा, ‘जब बात इसतरह के बुरे पड़ोसी की हो जो आतंकवाद को जारी रखता है, तब भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने जोड़ा कि भारत यह स्वीकार नहीं कर सकता कि कोई देश एक ओर पानी साझा करने की मांग करे और दूसरी तरफ भारत में आतंकवाद फैलाए। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति और कार्रवाई पूरी तरह संप्रभु निर्णय हैं।
जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे के समझौतों का जिक्र कर कहा कि इसतरह के समझौते अच्छे पड़ोसी संबंधों की बुनियाद पर टिके होते हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत ने कई दशक पहले पानी साझा करने की व्यवस्था पर सहमति दी थी, लेकिन यह मानकर कि दोनों देशों के बीच न्यूनतम स्तर की सद्भावना और अच्छे संबंध होते है।

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