प्रधानमंत्री ने युवाओं को दिया मंत्र कहा- समुद्र कभी जल के लिए भिक्षा नहीं मांगता
नई दिल्ली। बजट पेश होने के बाद संसद में चर्चा की शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के लिए एक विशेष प्रेरक संदेश साझा किया है। प्रधानमंत्री ने एक प्राचीन श्लोक के माध्यम से बजट के दूरगामी लक्ष्यों को युवाओं के सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता से जोड़कर प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर नाम्भोधिरर्थितामेति सदाम्भोभिश्च पूर्यते। आत्मा तु पात्रतां नेयः पात्रमायान्ति सम्पदः॥ श्लोक साझा करते हुए इसका अर्थ समझाया कि जिस प्रकार अथाह जलराशि के लिए समुद्र कभी किसी से भिक्षा नहीं मांगता, फिर भी वह सदैव जल से लबालब भरा रहता है; उसी प्रकार यदि व्यक्ति स्वयं को योग्य और पात्र बना ले, तो धन-संपत्ति और सफलता स्वतः उसके पास खिंची चली आती है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता वह दीपक है, जो आत्मसम्मान और सामर्थ्य का मार्ग प्रशस्त करता है। यह बजट हमारे युवा साथियों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे पूर्व, बजट की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे हाई कैपेक्स और हाई ग्रोथ का एक अनोखा मेल बताया था। उन्होंने जोर दिया कि यह बजट राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और महंगाई पर लगाम कसने के साथ-साथ विकास की गति को नई ऊंचाई देने वाला है। बजट में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जलमार्गों के विस्तार और हाई स्पीड रेल कॉरिडोर जैसे बड़े कदम उठाए गए हैं। साथ ही, टियर-2 और टियर-3 शहरों के आर्थिक विकास के लिए म्युनिसिपल बांड्स को बढ़ावा देना विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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