न्यायाधीश किसी भी दबाव में सही फैसला लेने से संकोच न करें
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट जज बीवी नागरत्ना ने न्यायाधीशों को अपने फैसले पर अड़े रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी दबाव में सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। वह केरल हाईकोर्ट में आयोजित दूसरे टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर मेमोरियल लेक्चर में बोल रहीं थीं। इससे पहले उन्होंने मीडिया को लेकर भी ऐसी ही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी तरह की बाधा, भय या प्रभाव में मीडिया अपनी भूमिका नहीं निभा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जजों को सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। फिर चाहे इसकी वजह से उनकी उन्नति ही क्यों न रुक जाए या सत्ता में बैठे लोग नाराज हो जाएं। उन्होंने कहा कि एक जज को राजनीतिक दबाव, संस्थागत धमकी या पॉपुलर डिमांड से मुक्त ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा था कि प्रेस पर कब्जा करने के हालिया प्रयासों के पीछे न केवल आर्थिक आधार हैं बल्कि राजनीतिक पहलू भी शामिल हैं।
खास बात है कि जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी। जस्टिस नागरत्ना ने साफ तौर पर कहा कि मीडिया अपना काम ठीक से तभी कर सकता है जब वह किसी भी तरह के डर या दबाव से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रेस की आजादी को सबसे बड़ा खतरा सीधे तौर पर लगने वाली पाबंदियों से नहीं है। बल्कि, असली खतरा आर्थिक नीतियों, लाइसेंस देने के कड़े नियमों और मीडिया कंपनियों के मालिकाना हक से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि एक मीडिया प्रतिष्ठान कानूनी रूप से सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हो सकता है, फिर भी आर्थिक रूप से इस तरह से मजबूर हो सकता है कि ऐसी आलोचना महंगी पड़ जाए।
उन्होंने कहा कि यह अधिकार भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी पेशे से जुड़ने या किसी भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार को चलाने की स्वतंत्रता के बीच परस्पर क्रिया से उभरता है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने बताया कि भारत में प्रेस की आज़ादी को संविधान दो अलग-अलग तरीकों से सुरक्षा देता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र मीडिया कितना जरूरी है।

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