21 साल पुराने मामले में आरोपी को मिली बड़ी कानूनी राहत
बिलासपुर, छत्तीसगढ़:छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दो दशक पुराने एक अपहरण और दुष्कर्म के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह प्रमाणित करने में विफल रहा कि घटना के वक्त युवती की उम्र 16 वर्ष से कम थी। साथ ही, मामले के तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने इसे आपसी सहमति से बना संबंध माना है।
निचली अदालत ने दी थी 7 साल की जेल
यह मामला साल 2003-04 का है, जिसमें 2005 में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी पर युवती को बहला-फुसलाकर भोपाल ले जाने और वहां दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर 21 साल बाद अब अंतिम निर्णय आया है।
उम्र के दस्तावेज़ों पर कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल स्कूल के दाखिल-खारिज रजिस्टर की प्रविष्टि को उम्र का पुख्ता प्रमाण नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब उस रिकॉर्ड को दर्ज करने वाले व्यक्ति का बयान दर्ज न कराया गया हो। मेडिकल जांच में भी युवती की उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच बताई गई थी, जिससे उसके 'नाबालिग' होने का दावा कानूनी रूप से संदेह के घेरे में आ गया।
परिस्थितियां दर्शाती हैं 'सहमति'
हाईकोर्ट ने गौर किया कि युवती करीब एक महीने तक आरोपी के साथ भोपाल में रही। इस दौरान उसने कई सार्वजनिक स्थानों का भ्रमण किया और अनेक लोगों से मिली, लेकिन कहीं भी अपनी मर्जी के खिलाफ ले जाए जाने या शोषण की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। इसके अलावा, मेडिकल रिपोर्ट में भी जबरदस्ती या संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले। अदालत ने माना कि ये स्थितियां स्पष्ट रूप से आपसी सहमति की ओर इशारा करती हैं।
अपहरण के दावों में दम नहीं
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि अभियोजन यह साबित करने में भी अक्षम रहा कि आरोपी ने युवती को शादी के लिए मजबूर करने या किसी गलत इरादे से उसका अपहरण किया था। साक्ष्यों के अभाव और तथ्यों में विरोधाभास के कारण हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी को दोषमुक्त कर जेल से रिहा करने का आदेश दिया।

तकनीक, समन्वय और प्रशिक्षित पुलिस बल के दम पर होगा सुरक्षित एवं व्यवस्थित सिंहस्थ-2028 - डीजीपी कैलाश मकवाणा
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से होमेश्वर प्रसाद जायसवाल को मिली राहत, शून्य हुआ बिजली बिल
बिलासपुर संभागायुक्त ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का किया निरीक्षण
युवाओं के लिए मध्यप्रदेश के 4 महानगरों में प्रारंभ होंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: सृष्टि को घर के बिजली बिल में मिली बड़ी राहत
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076: सीसी रोड बनने से ग्रामीणों को मिली राहत
गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही से पूर्ण हों सभी सेतु निर्माण परियोजनाएं : लोक निर्माण मंत्री सिंह
संतों की वाणी से बेहतर जीवन का मार्ग प्रशस्त होता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव