केन-बेतवा लिंक परियोजना: धोड़न में आग, एक आदिवासी युवक की मौत
छतरपुर। (मध्य प्रदेश) केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले गांव 'धोड़न' से दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। विकास के नाम पर प्रशासन और पुलिस की 'दमनकारी' कार्यवाही ने आदिवासियों के जीवन को नर्क बना दिया है। ताजा अपडेट के अनुसार, पुलिस की घेराबंदी और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण एक आदिवासी युवक की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य ग्रामीण अभी भी कोमा में हैं।
बिना नोटिस जमींदोज किए आशियाने, दागे आंसू गैस के गोले
ग्रामीणों का आरोप है कि 14 मई को भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमला बिना किसी पूर्व कानूनी नोटिस के घरों को गिराने पहुँच गया। जब निहत्थे आदिवासियों ने अपने हक की आवाज़ उठाई, तो उन पर बर्बरतापूर्वक आंसू गैस के गोले दागे गए।
धर्मशाला में आग: पुलिस द्वारा छोड़े गए आंसू गैस के गोलों की वजह से गांव के मंदिर परिसर में स्थित एक धर्मशाला में आग लग गई, जिससे वह जलकर राख हो गई।
इलाज के अभाव में मौत: पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने किसी को बाहर नहीं निकलने दिया, जिसके कारण एक बीमार युवक समय पर अस्पताल नहीं पहुँच सका और उसने दम तोड़ दिया।
महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार
आंसू गैस के धुएं से दर्जनों महिलाएं बेहोश हो गईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ के कारण चीख-पुकार मच गई, लेकिन प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय अपनी कार्यवाही जारी रखी। ग्रामीणों का कहना है कि यह 'विकास' नहीं बल्कि 'मानवीय नरसंहार' है।
प्रशासन को खुली चुनौती: "एक भी धारा का प्रमाण दें"
जेल से बाहर आने के बाद अपनी माताजी के खराब स्वास्थ्य के कारण फिलहाल मौके पर न पहुँच पाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश जताया है। उन्होंने कलेक्टर और प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए कहा:
"प्रशासन भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की वैध प्रक्रिया के अंतर्गत लागू किसी भी एक धारा का प्रमाण प्रस्तुत कर दे, तो मैं जिम्मेदारी लेता हूं कि बिना किसी पुलिस बल के, मात्र एक दिन में सभी गांवों को शांतिपूर्ण तरीके से खाली करवा दूंगा।"
भटनागर ने आरोप लगाया कि प्रशासन अपने भ्रष्टाचार को छिपाने और बिना उचित मुआवजे के आदिवासियों को खदेड़ने के लिए फर्जी मुकदमे दर्ज कर रहा है।
वर्तमान स्थिति: दहशत और नाकाबंदी
धोड़न गांव वर्तमान में बाहरी दुनिया से कटा हुआ है। प्रशासन ने गांव की घेराबंदी कर रखी है—न किसी को अंदर जाने दिया जा रहा है और न ही बाहर। ग्रामीण अपने ढहे हुए मकानों के मलबे पर बैठकर मातम मना रहे हैं।
प्रमुख मांगें:
•दमनकारी कार्यवाही पर तुरंत रोक लगाई जाए।
•मृतक युवक के परिवार को मुआवजा मिले और दोषी अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज हो।
•मानवाधिकारों के हनन की उच्च स्तरीय जाँच हो।
अपील: 'जय किसान संगठन' और अमित भटनागर ने प्रभावित क्षेत्र के लोगों से इस विकट परिस्थिति में भी शांति बनाए रखने की अपील की है।
"मिट्टी की रक्षा में लगी हर चोट, हमारे लोकतंत्र पर घाव है। न्याय तक संघर्ष जारी रहेगा" _ प्रभावित ग्रामीण
मीडिया सेल
जय किसान संगठन

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