काशी में कब से शुरू होगी पंचकोशी यात्रा? क्या है इसका धार्मिक महत्व
धर्म नगरी काशी दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है. इस शहर में अधिमास के महीने में पंचकोशी यात्रा की शुरुआत होती है. पंचकोशी यात्रा काशी की सबसे प्राचीन पवित्र परिक्रमाओं में से एक है. 25 कोस यानी यह यात्रा करीब 88 किलोमीटर की है, जो भक्त पैदल ही करते हैं. पंचकोशी यात्रा में पांच पड़ाव होते हैं और यह यात्रा 5 दिनों की होती है. इस यात्रा का सीधा कनेक्शन महाभारत काल से जुड़ा हुआ भी है.
काशी के विद्वान पंडित विकास पांडेय ने बताया कि उस यात्रा से मनुष्य को पांच विकारों से मुक्ति मिल जाती है, जिसमें काम, क्रोध, मोह, लोभ और मद शामिल है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस यात्रा से दुनिया के समस्त तीर्थों के दर्शन का पुण्य मिलता है और सम्पूर्ण ब्रह्मण्ड की परिक्रमा होती है.
यहां से शुरू होती है यात्रा
इस यात्रा की शुरुआत मणिकर्णिका कुंड से होती है. यहां भक्त संकल्प कर यह यात्रा की शुरुआत करते हैं. इस यात्रा का पहला पड़ाव कर्मदेश्वर महादेव होता है. इसके बाद भक्त दूसरे दिन शिवपुर में ठहरते हैं. तीसरा पड़ाव रामेश्वरम, चौथा भीमचंडी और आखरी पड़ाव कपिलधारा होता है. उसके बाद भक्त मणिकर्णिका कुंड पहुंच अपनी यात्रा को समाप्त करते हैं.
मोक्ष की होती है प्राप्ति
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, काशी के सीमा पर आधारित इस पैदल यात्रा पर चलने से भक्तों को जन्म-मरण के पापों से मुक्ति मिल जाती है और मनुष्य सीधे शिव लोक यानी मोक्ष को प्राप्त करता है. कथाओं के अनुसार, दुर्योधन से राज पाठ वापस पाने की कामना से पांडवों ने भी इस यात्रा को किया था. इसी यात्रा के प्रभाव से उन्हें उनका राज-पाठ वापस मिला था. इसलिए भक्त अपने मनोवांछित फल की कामना से इस पवित्र यात्रा को करते हैं.

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