बंगाल की राजनीति में बड़ा खेल! विधायक के बाद सांसदों को साधने की तैयारी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी से निकाले गए वरिष्ठ विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी विधायकों का एक बड़ा गुट पार्टी से अलग हो गया है। टीएमसी के अंदर मचे इस घमासान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पैनी नजर बनी हुई है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि अगर टीएमसी में यह टूट बड़े स्तर पर होती है, तो इसका सीधा फायदा केंद्र सरकार को संसद में मिल सकता है, जहां कई महत्वपूर्ण कानूनों को पास कराने के लिए सरकार को अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत है।
संसद में मोदी सरकार को मिल सकता है बड़ा फायदा
बीजेपी के रणनीतिकारों का सोचना है कि यदि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से नाराज चल रहे टीएमसी सांसद भी विधायकों की तरह एक अलग गुट बना लेते हैं, तो वे संसद में मोदी सरकार के पक्ष में खड़े हो सकते हैं। वैसे तो बीजेपी को बंगाल की स्थानीय राजनीति में किसी नए साथी की जरूरत नहीं है, लेकिन संसद में अपनी ताकत बढ़ाना उसकी बड़ी प्राथमिकता है। हाल ही में देश में लोकसभा सीटों की संख्या 545 से बढ़ाकर 850 करने वाला बेहद अहम परिसीमन (Delimitation) विधेयक जरूरी दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पास नहीं हो सका था। सरकार भविष्य में इस बिल के साथ-साथ 'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल को भी दोबारा लाने की तैयारी में है, जिसके लिए उसे बाहरी समर्थन की सख्त जरूरत होगी।
शिवसेना, एनसीपी और आम आदमी पार्टी जैसा घटनाक्रम
टीएमसी के भीतर मची इस बगावत की तुलना बीजेपी नेता महाराष्ट्र के उस घटनाक्रम से कर रहे हैं, जहां शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में बड़ी टूट हुई थी। इसके साथ ही हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी (AAP) को लगे झटके का उदाहरण भी दिया जा रहा है, जहां राघव चड्ढा के नेतृत्व में 'आप' के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। इसी तर्ज पर अब बंगाल में भी टीएमसी के टूटने के कयास लगाए जा रहे हैं।
चुनाव हारने के बाद तमिलनाडु की डीएमके पर भी बढ़ा दबाव
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की पार्टी डीएमके (DMK) की हार के बाद बीजेपी ने वहां भी अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। इस चुनाव में मिली हार और उनकी सहयोगी कांग्रेस के जोसेफ विजय की पार्टी 'टीवीके' (TVK) के नेतृत्व वाली नई सरकार में शामिल होने के फैसले से डीएमके इस समय काफी दबाव में है। माना जा रहा है कि इस बदले राजनीतिक माहौल के बीच डीएमके कुछ खास विधेयकों पर केंद्र की बीजेपी सरकार को समर्थन देने के बदले बातचीत का रास्ता तलाश रही है।
ऋतब्रत बनर्जी बने बंगाल में विपक्ष के नेता, सांसदों में भी नाराजगी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तब और तेज हो गई जब टीएमसी से बाहर किए गए ऋतब्रत बनर्जी को राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी गई। ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि उन्हें पार्टी के 60 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। दूसरी तरफ, विधायकों की तरह टीएमसी के कई सांसद भी पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। हाल ही में अभिषेक बनर्जी पर हुए एक हमले के विरोध में जब ममता बनर्जी ने आंदोलन का आह्वान किया था, तो टीएमसी के कुल 41 सांसदों (लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर) में से केवल 8 सांसद ही वहां पहुंचे थे। सांसदों की इस कम मौजूदगी ने इन चर्चाओं को हवा दे दी है कि क्या विधायकों की तरह अब टीएमसी के सांसद भी बगावत कर अपना कोई अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं।

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