NRI निवेशकों के लिए नया मौका, डॉलर-रुपया स्वैप स्कीम से बढ़ेगी कमाई
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती प्रदान करने के लिए वाणिज्यिक बैंकों के लिए एक विशेष 'डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा' की शुरुआत की है। यह नई व्यवस्था प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा बैंकों में सावधि जमा के रूप में रखी जाने वाली नई फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट यानी एफसीएनआर (बी) जमा राशियों पर लागू होगी। इस योजना के अंतर्गत जब भी कोई एनआरआई किसी भारतीय बैंक में विदेशी मुद्रा जमा कराएगा, तो संबंधित बैंक उस धनराशि को डॉलर में परिवर्तित कर केंद्रीय बैंक (आरबीआई) के पास जमा कर देगा। इसके साथ ही दोनों संस्थाओं के बीच एक अग्रिम अनुबंध होगा, जिसके तहत जमा अवधि पूरी होने पर आरबीआई उसी पुरानी विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) पर बैंकों को डॉलर वापस लौटा देगा। इस हेजिंग व्यवस्था से बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के वित्तीय जोखिम से पूरी सुरक्षा मिलेगी।
केंद्रीय बैंक से मिलेगी सब्सिडी और बढ़ेंगी ब्याज दरें
आरबीआई इस विशेष फॉरेक्स स्वैप सुविधा के माध्यम से बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों को बिना किसी भारी हेजिंग लागत के विदेशी पूंजी जुटाने का अवसर दे रहा है। इस प्रक्रिया में लगने वाली स्वैप लागत पर केंद्रीय बैंक की ओर से सालाना 1.5 प्रतिशत की आकर्षक सब्सिडी भी दी जाएगी। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस रियायत के बाद बैंक एनआरआई जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए एफसीएनआर (बी) खातों पर अपनी ब्याज दरों को बढ़ाकर 6 से 6.5 फीसदी तक कर सकते हैं। इसके अलावा, बैंकिंग क्षेत्र में जमा राशि जुटाने की आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते कुछ विशेष चुनिंदा अवधियों के लिए यह ब्याज दर अधिकतम 7 प्रतिशत के स्तर को भी छू सकती है।
स्वैप विंडो के संचालन के लिए कड़े नियम और शर्तें तय
इस नई योजना को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए रिजर्व बैंक ने कुछ कड़े नीतिगत दिशानिर्देश और सीमाएं तय की हैं। इसके तहत बैंक आरबीआई के साथ न्यूनतम 10 लाख अमेरिकी डॉलर या इसके गुणक (मल्टीपल) में ही स्वैप सौदा कर सकेंगे। यह रियायती सुविधा केवल उन्हीं जमाओं पर देय होगी जो न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष की परिपक्वता अवधि (मैच्योरिटी) के लिए लॉक होंगी। इसके अतिरिक्त, एनआरआई जमाकर्ता भले ही पाउंड, यूरो या अन्य किसी प्रमुख विदेशी मुद्रा में निवेश करें, लेकिन वाणिज्यिक बैंकों और आरबीआई के बीच अंतिम लेनदेन अनिवार्य रूप से केवल अमेरिकी डॉलर में ही निष्पादित किया जाएगा। इस योजना में निवेशकों के लिए एक साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होगा, जिससे पहले रकम की निकासी नहीं हो सकेगी और बैंकों के लिए एक बार किया गया स्वैप सौदा बीच में रद्द करने योग्य नहीं होगा।
वर्तमान में मिल रहे ब्याज के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद होगी योजना
यदि मौजूदा बैंकिंग परिदृश्य पर नजर डालें, तो वर्तमान समय में देश के प्रमुख सरकारी और निजी बैंकों में अमेरिकी डॉलर पर आधारित एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दरें काफी कम यानी 3.85 प्रतिशत से लेकर 5 फीसदी के दायरे में ही सिमटी हुई हैं। वर्तमान में बैंक ऑफ बड़ौदा एक से दो साल की अल्पावधि जमा पर सबसे अधिक 5 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और कोटक महिंद्रा बैंक की दरें लगभग 4.40 फीसदी के आसपास हैं। इसके अलावा एक्सिस बैंक 4 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक 3.95 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक सबसे कम 3.85 फीसदी तक का ब्याज ऑफर कर रहे हैं। ऐसे में आरबीआई की यह नई स्वैप नीति प्रवासी भारतीयों को भारतीय बैंकों में सुरक्षित और अधिक रिटर्न वाले निवेश का एक बेहतरीन विकल्प प्रदान करेगी।

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