20 जुलाई से शुरू हो सकता है मानसून सत्र, सरकार ला सकती है बड़े विधेयक
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से प्रारंभ होने की संभावना है। यह पूरा सत्र करीब 15 दिनों तक चल सकता है, जिसके दौरान 10 से 12 विधायी बैठकें आयोजित की जाएंगी। विधानसभा सचिवालय की ओर से इस सत्र के आयोजन का आधिकारिक प्रस्ताव राज्यपाल मंगुभाई पटेल को भेज दिया गया है। राजभवन से इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के तुरंत बाद सत्र की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार, किसी भी विधानसभा सत्र की शुरुआत से कम से कम एक महीना पहले उसकी सूचना सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है। इस नियम के तहत माना जा रहा है कि 19 जून तक सत्र से जुड़ी अधिसूचना हर हाल में जारी हो जाएगी। अधिसूचना के साथ ही विधायकों के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश करने और नियम 139 के तहत विभिन्न जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने की समय सीमा भी निर्धारित कर दी जाएगी।
बजट और नए अध्यादेशों पर होगी चर्चा
इस आगामी सत्र के दौरान राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना पहला अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखेगी। इसके अतिरिक्त, विधायी कामकाज के तहत कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से पंचायत एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश – 2026 और मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश 2026 शामिल हैं, जिनके लिए शासन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
यूसीसी की सिफारिशें पटल पर रखने के संकेत
मानसून सत्र के दौरान सबसे ज्यादा नजरें समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़े घटनाक्रमों पर टिकी रहेंगी। राज्य सरकार द्वारा यूसीसी को लेकर आम जनता और विशेषज्ञों से सुझाव मांगने की तय समय सीमा 15 जून को समाप्त हो चुकी है। अब सरकार इन प्राप्त सुझावों की समीक्षा करने और ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने में जुट गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी कई सार्वजनिक मंचों से इसके संकेत दिए हैं।
आदिवासी समुदाय को मिलेगी विशेष छूट
मुख्यमंत्री के बयानों के अनुसार, समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए गठित की गई पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और सुझावों को इसी मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस कानून के दायरे से प्रदेश की मूल निवासी आदिवासी जनजातियों को पूरी तरह अलग रखा जाएगा। इसके साथ ही, कानून को लागू करने से पहले सभी वर्गों के बीच एक व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।

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