जस्टिस यशवंत वर्मा पर गिरी गाज, लोकसभा सांसदों ने दिया हटाने का प्रस्ताव
हाल ही में संसद में एक बड़ा कदम उठाया गया है। संसद के दोनों पक्षों — सत्ता पक्ष और विपक्ष — के कुल 145 लोकसभा सांसदों ने मिलकर एक प्रस्ताव नोटिस दिया है। इस प्रस्ताव का मकसद दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू करना है।
यह मामला तब सामने आया था जब 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई। आग बुझाने के दौरान वहां नोटों की गड्डियां मिलने से हड़कंप मच गया। इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक पैनल ने की। पैनल ने पाया कि इन आरोपों में कुछ सच्चाई है।
सांसदों द्वारा दिया गया यह नोटिस ‘जजेज़ इन्क्वायरी एक्ट, 1968’ के तहत आता है। इस कानून के अनुसार, अगर किसी जज के खिलाफ शिकायत लोकसभा में करनी हो, तो कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। राज्यसभा में यही प्रक्रिया 50 सांसदों के हस्ताक्षरों से शुरू की जाती है।
इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वालों में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, बीजेपी के अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूड़ी, पी पी चौधरी, कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल और एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा टीडीपी, जेडीयू, जेडीएस, जनसेना पार्टी, एजीपी, शिवसेना और सीपीआई (एम) के सांसदों ने भी समर्थन दिया है।
अब यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के पास भेजा गया है। अध्यक्ष चाहे तो इस प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं या नामंजूर कर सकते हैं। अगर प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो फिर एक तीन-सदस्यीय समिति बनाई जाएगी — जिसमें दो जज और एक प्रसिद्ध न्यायविद होंगे। यह समिति जांच करेगी कि क्या इस मामले में जज को हटाने की कार्यवाही शुरू होनी चाहिए या नहीं।
यह पूरा मामला देश की न्यायिक व्यवस्था और संसद की जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

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