DTC की एक चूक और कंडक्टरों के घर संकट, आखिर कौन है इस लापरवाही का जिम्मेदार?
नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली की सड़कों पर चल रही बसों में रोजाना करीब 41 लाख यात्री सफर करते हैं. रोजाना लाखों टिकट भी बिकती हैं. इन दिनों दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों में टिकट नंबरों की मिस प्रिंटिंग ने एक गंभीर समस्या खड़ी कर दी है.
दरअसल, टिकटों की नंबरिंग में तकनीकी गड़बड़ी के कारण कई बार नंबर बीच में से गायब हैं. इससे यात्रियों को कोई समस्या नहीं हो रही है, लेकिन कंडक्टरों की नौकरी खतरे में आ रही है. क्योंकि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि टिकटें अधिक बेची गई हैं, जबकि यात्रियों की संख्या कम रहती है. ऐसी स्थिति में सबसे पहले शक बस कंडक्टर पर ही जाता है. डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया है.
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी का कहना है कि टिकटों के नंबर की मिस प्रिंटिंग की कई शिकायतें आई हैं. टिकट जांच के दौरान जब टिकट नंबरों का मिलान होता है तो नंबरों में अंतर पाया जाता है. ऐसे में कंडक्टरों से जवाब-तलब की जाती है. इसकी एक्स पर पोस्ट डालकर डीटीसी मुख्यालय में शिकायत दी गई है. लिखित में भी शिकायत देंगे कि इस समस्या को ठीक किया जाए, जिससे कंडक्टर पर किसी और की लापरवाही की जवाबदेही न तय हो. कई बार कंडक्टर सही जवाब नहीं दे पाते क्योंकि यह गलती उनकी नहीं बल्कि प्रिंटिंग प्रक्रिया की होती है. इसके चलते न केवल उन्हें मानसिक तनाव झेलना पड़ता है, बल्कि उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाती है
टिकट प्रिंटिंग में तकनीकी गड़बड़ी की जांच हो:
यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर उदाहरण के तौर पर कई वीडियो साझा किए हैं, जिनमें साफ देखा जा सकता है कि टिकटों की नंबरिंग में गलतियां है. उन्होंने यह भी बताया कि कई कंडक्टरों को इस कारण नोटिस तक थमा दिए गए हैं, जो बिल्कुल भी अन्यायपूर्ण है. डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन की मांग है कि टिकट प्रिंटिंग में हो रही इस तकनीकी गड़बड़ी की गहन जांच कराई जाए. जब तक यह समस्या हल नहीं होती तब तक किसी भी कंडक्टर को दोषी न ठहराया जाए. साथ ही उन्होंने सुझाव दिया है कि धीरे-धीरे टिकटिंग प्रणाली को डिजिटल किया जाए, जिससे इस प्रकार की गड़बड़ियों से कोई समस्या न हो.
41 लाख यात्री रोजाना करते हैं सफर:
दिल्ली में वर्तमान में 7500 से अधिक बसें चल रही हैं, जिनमें करीब 41 लाख यात्री रोजाना सफर करते हैं. इन बसों में बहुत कम डिजिटल टिकट लेते हैं. महिलाओं का सफर फ्री है, लेकिन उन्हें यात्रा के दौरान पिंक टिकट लेना पड़ता है, जो बस में यात्रा के समय कंडक्टर से लेना पड़ता है. इसके साथ ही सभी पुरुषों का टिकट लगता है. पांच साल तक के बच्चों का टिकट नहीं लगता है. 5 से 12 साल तक के बच्चों का हाफ टिकट लगता है. बहुत से यात्री एमएसटी पास के जरिए भी सफर करते हैं.

एमपी विधानसभा के बजट सत्र में हाई अलर्ट,परिसर में अंगरक्षकों की एंट्री पर रोक
असम में ‘मिया’ मुसलमानों को लेकर क्यों तेज हुई सियासी मुहिम? विवादित वीडियो से बढ़ा राजनीतिक टकराव
जनसंपर्क अधिकारी पर दबाव का आरोप, रॉयल प्रेस क्लब पहुंचा थाने
वाराणसी कचहरी में बम धमकी से हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
कुक स्ट्रेट फतह करने वाले पहले एशियन पैरास्विमर बने सतेंद्र, 9 घंटे 22 मिनट में रचा इतिहास
मंत्रालय में फर्जी IAS की एंट्री से हड़कंप, बैच नंबर पूछते ही खुली पोल, नकली अफसर गिरफ्तार
राज्यसभा में कांग्रेस के भीतर तकरार, खरगे और जयराम रमेश के बीच तीखी बहस
जयपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने 8 महीने की मासूम की हत्या की